राजस्थान के खैरतल-तिजारा में एक Blue Drum Murder Case से जुड़ी दर्दनाक कहानी—पति की हत्या, बच्चे की गवाही और परिवार की टूटन। पढ़िए पूरी संवेदना भरी रिपोर्ट।
चर्चा का विषय
Blue Drum Murder Case प्रेम त्रिकोण ने ले ली जान
राजस्थान के अलवर जिलें में स्थित खैरतल-तिजारा के किशनगढ़ बास कस्बे को हाल ही में एक हैरान कर देने वाली घटना ने झकझोर दिया है। यहाँ, 35 वर्षीय हंसराज की पत्नी और उसके कथित प्रेमी ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और शव को नीले ड्रम में भरकर छिपा दिया — एक ऐसी क्रूर घटना जो सीधे रूप में “अफेयर-परिवार-हत्या” की कहानी बताती है।
लेकिन यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है; यह उस समाज की सोच पर सवाल है जहां प्रेम, विश्वास और अपराध किस हद तक पहुँच सकते हैं।
घटना का पहला खुलासा
मृतक की पहचान: हंसराम (हंसराज), उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी, जो किशनगढ़ बास में किराए पर टेरेस रूम लेकर रहते थे। वह स्थानीय एक ईंट भट्टे (brick kiln) पर काम करते थे ।
शव की खोज: 17 अगस्त को घर की लैंडलेडी (माताजी) ने नीले ड्रम से बदबू आने की सूचना पुलिस को दी। अंदर से पटे होने के कारण शव क्षयावस्था में था। सॉल्ट (नमक) और कपड़े भी ड्रम में रखे थे, संभवतः गंध रोकने या शव को जल्दी प्रभावित करने के लिए ।
थोroat injury के निशान थे, जो हत्या को स्पष्ट करते थे ।
अपराध की वजह और आरोपी
Blue drum murder case मामला एक भावनात्मक और प्रतिबंधित संबंध से जुड़ा है — पति की पत्नी राशीता देवी (लक्ष्मी देवी) और उसका संबंध उसके मकान मालिक के बेटे जितेंद्र कुमार से। पति हंसराज को इस संबंध का पता चल गया था। पुलिस के अनुसार, इसे छिपाने के उद्देश्य से युगल ने हत्या की साजिश रची और हंसराज को नीले ड्रम में डाल दिया ।
बच्चे के बयान ने उजागर कर दी पूरी कहानी
घटना की सबसे भयानक कड़ी आया 8 वर्षीय बेटे, हर्षल, के बयान से। उसने पुलिस को बताया कि सुबह जागने पर उसने अपने पिता को बिस्तर पर घायल अवस्था में देखा, लेकिन बाद में देखा कि मां और “चाचा” (जदिंद्र) शव को नीले ड्रम (Blue drum) में डाल रहे हैं।
उसने यह भी बताया कि उस रात पार्टी चल रही थी, सब पी रहे थे, और पिता ने मां को पीटा, जिसके बाद झगड़ा बढ़ा और चाचा ने हत्या की।
बाद में परिवार को ईंट भट्टे पर लेकर जाया गया, जहाँ अक्सर लोग काम करवाने जाते थे। पुलिस को जानकारी स्थानीय ग्रामीणों ने दी और युगल को गिरफ़्तार किया गया ।
यहाँ पढ़े :- Husband had learnt about wife’s affair’: What cops said on Rajasthan murder
पुलिस की कार्रवाई — गति और सतर्कता
SP मनीष चौधरी ने बताया कि उन्हें 17 अगस्त को सूचना मिली और अगले ही दिन — यानी 18 अगस्त को — पत्नी व प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया। मृतक के तीन बच्चों को पिता के परिवार को सौंप दिया गया ।
पुलिस ने ऑपरेशन को तेज़ी से अंजाम दिया, जहां उन्होंने जल्दी से अपराधियों को धर दबोचा। मामले में ठोस सबूत — ड्रम, नमक, कपड़े — बरामद हुए।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और भावनात्मक अपील
यह मामला मीडिया और जनता के बीच ठंडा नहीं बैठा। लोगों ने पूछा: “क्या घर आ कर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे?”
एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह सिर्फ़ एक केस नहीं — परिवार टूटने की कहानी है।”
हंसराज का परिवार माँग कर रहा है — मुक़दमे में सुधार, प्रत्यक्ष साक्ष्य, सख्त कानून की मांग, और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा।
संदर्भ में अन्य “ड्रम-मर्डर” केस
यह कांड मेरठ ब्लू-ड्रम मर्डर जैसी ही एक घटना की याद ताज़ा करता है, जहां व्यापारी की पत्नी और उसका प्रेमी ने पति की हत्या कर दी और शव को सीमेंट से भरे ड्रम में छुपाया था ।
ऐसे मामले न केवल राजस्थान तक सीमित हैं — बल्कि सम्पूर्ण भारत में ये “क्राइम थ्रिलर” जैसे केस बन कर उपजी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इनके पीछे अक्सर आशिकि ड्रामा, पतन, और अहंकार काम करता है।
मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विश्लेषण
कई अपराध मनोविज्ञानकर्ताओं का मानना है कि अफेयर-केंद्रित क्राइम में इमोशन, गुस्सा, शर्म और डर मिलकर क्रूरता को जन्म देते हैं।
घरेलू हिंसा के शिकार बच्चों में कभी-कभी मानसिक प्रभाव बहुत गहरा होता है। इस केस में तो 8 वर्षीय बच्चा ही साक्षी बना — यह समाज की भावनात्मक जटिलता को दर्शाता है।
ऐसी घटनाएं कानून व्यवस्था, मनो-परामर्श, और नारी सुरक्षा की दिशा में बदलाव लाती हैं।
सुधार की राह और सुझाव
स्कूलों में बच्चे सुरक्षा शिक्षा: बच्चों को सिखाना कि वे किसी भी असहज घटना पर किसे सूचित करें।
प्रशासनिक निगरानी: किराए पर रहने वालों की पृष्ठभूमि जाँच।
सामाजिक चेतना अभियान: पंचायत स्तर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना।
मनोचिकित्सक समर्थन: परिवार में तनाव और हिंसा के शिकार लोगों के लिए सामुदायिक सहायता।
निष्कर्ष — यह केवल कहानी नहीं, समाज की परीक्षा है
हंसराज का हत्या और नीले ड्रम में मौत का मामला सिर्फ़ अपराध नहीं—यह बेवफाई का प्रतीक, अपराध की बदसूरती और समाज की जिम्मेदारी का सवाल है।
बच्चे ने साक्षी होकर हमें बात बताई — क्या हम समाज भी गवाह बन कर खामोश रहेंगे? यह एक नहीं, कई परिवारों का जख्म है, और हमें मिलकर उसे भरना होगा।














