लॉरेंस बिश्नोई गिरोह उत्तरी भारत के सबसे कुख्यात संगठित अपराध समूहों में से एक है, जो मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में सक्रिय है। इस गिरोह का नेतृत्व लॉरेंस बिश्नोई करता है, जो 2015 से जेल में बंद है, लेकिन फिर भी जेल से ही अपने नेटवर्क को संचालित करता है। गिरोह की जड़ें छात्र राजनीति से जुड़ी हैं और यह धीरे-धीरे जबरन वसूली, हत्याओं, ड्रग तस्करी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लक्षित हमलों तक फैल गया। कनाडा ने हाल ही में इस गिरोह को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, जो भारत-कनाडा संबंधों में तनाव का कारण बना। गिरोह के सदस्यों की संख्या लगभग 700 बताई जाती है, और यह 2,500 से अधिक छिपने के ठिकानों का इस्तेमाल करता है।
चर्चा का विषय
प्रारंभिक जीवन और गिरोह की शुरुआत
लॉरेंस बिश्नोई का जन्म 1993 में पंजाब के फाजिलका जिले के दुतारनवाली गांव में एक संपन्न परिवार में हुआ। उनके पिता लविंदर बिश्नोई एक पूर्व पुलिस अधिकारी हैं, जो बाद में परिवार की 100 एकड़ से अधिक जमीन संभालते हैं, जबकि मां सुनीता बिश्नोई एक गृहिणी हैं। परिवार बिश्नोई समुदाय से है, जो 15वीं शताब्दी में गुरु जम्भेश्वर द्वारा स्थापित है और पर्यावरण संरक्षण, पशु रक्षा (जैसे ब्लैकबक हिरण) पर जोर देता है। लॉरेंस को उनके गोरे रंग के कारण ब्रिटिश अधिकारी हेनरी लॉरेंस के नाम पर रखा गया। उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में पढ़ाई की और 2007-2008 में छात्र राजनीति में शामिल हुए।
2009 में, वे छात्र नेता विक्की मिद्दुखेड़ा से मिले और पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (SOPU) में शामिल हो गए। अप्रैल 2010 में, 18 साल की उम्र में, उनका पहला एफआईआर दर्ज हुआ – एक छात्र संघ चुनाव में झगड़े के दौरान आगजनी और हत्या के प्रयास के आरोप में। जेल में रहते हुए, उन्होंने हथियार तस्कर रंजीत दुप्लान और गैंगस्टर रॉकी फाजिलका जैसे अपराधियों से संपर्क बनाया, जो उनके गिरोह की नींव बने। 2010 के दशक में, गिरोह ने छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया में कदम रखा, पंजाब में ड्रग तस्करी और हथियारों की स्मगलिंग में शामिल हो गया। 2013-2014 में पंजाब में ड्रग्स से जुड़े केसों की बाढ़ आई, और गिरोह ने इसका फायदा उठाया।
प्रमुख घटनाएं (टाइमलाइन)
- 2010-2015: गिरोह का विस्तार पंजाब से उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली तक। 2015 में लॉरेंस को गिरफ्तार किया गया और पंजाब से गुजरात की साबरमती जेल में स्थानांतरित किया गया, जहां से वे अब भी ऑपरेट करते हैं।
- 2015 से: प्रतिद्वंद्वी गिरोहों (जैसे लकी पटियाल और सुखप्रीत बुड्डा) के साथ गैंग वॉर, जिसमें लगभग 20 हत्याएं हुईं।
- 2018: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को धमकी दी, 1998 में ब्लैकबक हिरणों की हत्या के लिए। जोधपुर कोर्ट में लॉरेंस ने कहा, “सलमान खान को जोधपुर में मार दिया जाएगा।”
- मई 2022: पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या, जिसकी जिम्मेदारी गिरोह ने ली। यह अंतर-गिरोह प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा था।
- अप्रैल 2023: सलमान खान के मुंबई घर पर गोलीबारी।
- जून 2023: कनाडा में खालिस्तानी एक्टिविस्ट हरदीप सिंह निज्जर की हत्या, जिसमें कनाडाई पुलिस ने गिरोह का हाथ बताया।
- सितंबर 2023: कनाडा में अलगाववादी सुखदूल सिंह की हत्या।
- अक्टूबर 2024: मुंबई में राजनेता बाबा सिद्दीकी की हत्या, सोशल मीडिया पर गिरोह ने जिम्मेदारी ली। इसी महीने, कनाडा ने गिरोह को भारत सरकार के एजेंट्स से जोड़ा, जिससे राजनयिक संकट पैदा हुआ।

आपराधिक गतिविधियां
गिरोह मुख्य रूप से जबरन वसूली, लक्षित हत्याओं, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी, और रंगदारी में शामिल है। यह पंजाबी फिल्म-म्यूजिक इंडस्ट्री, रियल एस्टेट और अवैध शराब व्यापार को निशाना बनाता है। लॉरेंस खुद 84 से अधिक केसों में आरोपी हैं, जिनमें 4 में दोषी ठहराए जा चुके हैं। गिरोह अक्सर अपनी हिंसा को नैतिकता या धार्मिक न्याय के आवरण में पेश करता है, जैसे पशु रक्षा या धर्म के खिलाफ बोलने वालों को सजा। पंजाब पुलिस ने 2022 में एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स बनाई, जिसने 500 से अधिक मॉड्यूल्स को तोड़ा और 1,400 से अधिक गिरफ्तारियां कीं।
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प्रमुख सहयोगी और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
- सहयोगी: भाई अनमोल बिश्नोई, गोल्डी ब्रार (कनाडा में), संपत नेहरा, रोहित गोदारा, काला जठेड़ी, जग्गू भगवानपुरिया। पाकिस्तान-आधारित खालिस्तानी आतंकवादी हरविंदर संधू (रिंदा) और कनाडा-आधारित लखविंदर सिंह (लांडा) से भी लिंक।
- अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: गिरोह की सेल्स कनाडा, अमेरिका, यूके, यूरोप, मिडिल ईस्ट, थाईलैंड, दुबई, फिलीपींस, पाकिस्तान, जर्मनी और इटली में हैं। कनाडाई पुलिस का आरोप है कि गिरोह भारत सरकार के इशारे पर खालिस्तानी समर्थकों को निशाना बनाता है। भारत ने इन आरोपों को खारिज किया है। गिरोह पाकिस्तान की आईएसआई से भी जुड़ा बताया जाता है।
वर्तमान स्थिति
लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में हैं, लेकिन सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजेस से गिरोह चलाते हैं। गिरोह की गतिविधियां बढ़ रही हैं, खासकर मुंबई के अंडरवर्ल्ड में। भारत में एनआईए ने इसे यूएपीए के तहत बुक किया है, जबकि कनाडा में इसे आतंकवादी ग्रुप माना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरोह 1990 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड की तरह बड़ा हो सकता है।













