पटना | फरवरी 2026
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच फिर एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। यह टकराव बजट बहस के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के बीच हुआ, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया।
सत्र में तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप
बजट सत्र में जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी, तब विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष पर जोरदार आरोप लगाए और सरकार की नीतियों पर तीखी नज़र डालते हुए सवाल उठाए। इनके जवाब में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे “चाहते हैं कि सब कुछ उनके अनुसार चले”, और कहा कि उन्हें बैठने के लिए कहा जाए।
दोनों नेताओं के बीच यह तकरार इतनी बढ़ गई कि सदन में हंगामा शुरू हो गया, नारेबाजी हुई और प्रक्रिया कई बार बाधित हुई।
विपक्ष का आरोप: सरकार वास्तविक मुद्दों से भाग रही है
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में बेरोज़गारी, विकास की धीमी गति और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ हैं जिनका समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को वास्तविक समस्याओं से दूर रख रही है और बजट सत्र का उपयोग राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए कर रही है।
तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि सत्तापक्ष ने विधानसभा चुनावों में विपक्ष को हराने के लिए बड़े पैमाने पर ₹40,000 करोड़ खर्च किए — जो उन्होंने “लोकतंत्र का शोषण” कहा।
सत्तापक्ष का रुख: गरिमा और नियमों की बात
सत्तापक्ष ने तेजस्वी के कई आरोपों पर आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह की भाषा और बयानबाज़ी सदन की गरिमा के विरुद्ध है। मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने जोर देकर कहा कि बजट बहस को विकास और नीति के मुद्दों पर केंद्रित रखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप पर।
सदन में हंगामे की वजह और परिणाम
हंगामा इतना बढ़ा कि स्पीकर को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी, और अनुशासनहीनता के चलते कुछ विधायकों को निलंबित भी किया गया। इससे बजट सत्र की समयBoundary पर भी असर पड़ा और कार्यसूची में देरी हुई।
विशेषज्ञों के मत में, यह टकराव राजनीतिक रणनीति और चुनावी बयानबाज़ी से प्रेरित लगता है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने एजेंडे को संसद के पटल पर जोरदार तरीके से पेश कर रहे हैं।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
बिहार में पिछले कुछ महीनों से सियासी तनाव बढ़ा हुआ है। 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद दोनों पक्षों के बीच असंतोष और रणनीतिक टकराव जारी है, और बजट सत्र इस मुकाबले को संसद के अंदर ले आया है। विपक्ष लगातार सरकार के प्रदर्शन, बेरोज़गारी और विकास की धीमी गति पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीतिक आरोप के रूप में खारिज कर रहा है।
आगे क्या?
अब बजट सत्र की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित कर दी गई है, लेकिन यह विवाद थमने वाला नहीं दिखता। दोनों पक्षों के बयान और आरोप आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं, खासकर जब विकास, रोजगार और बजट के मुद्दे जनता-स्तर पर गहराई से जुड़े हुए हैं।
ताज़ा व्यूज़ इस सत्र और बजट पर आगे होने वाले सभी घटनाक्रमों का तथ्य-आधारित विश्लेषण लगातार लाता रहेगा।













