फरीदाबाद | 9 फरवरी 2026
हरियाणा के फरीदाबाद स्थित नीमका जिला जेल में बंद आतंकवाद के एक गंभीर आरोप में गिरफ्तारी का सामना कर रहे आतंकी अब्दुल रहमान की जेल के अंदर ही हत्या कर दी गई। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था और हाई-प्रोफाइल कैदियों की देखरेख पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
जेल अधिकारियों के अनुसार, रविवार (8 फरवरी) की रात 20 वर्षीय अब्दुल रहमान पर उसी जेल में बंद कैदी अरुण चौधरी उर्फ अब्बू जट ने धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा चूक के सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
कौन था अब्दुल रहमान?
अब्दुल रहमान उत्तर प्रदेश के मिल्कीपुर क्षेत्र का रहने वाला बताया जाता है। मार्च 2025 में गुजरात एंटी-टेररिज़्म स्क्वाड (ATS) और केंद्रीय जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार किया गया था। उस पर अयोध्या के राम मंदिर पर विस्फोट की साजिश रचने और आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप थे। जांच में उसके पास से जिंदा हैंड ग्रेनेड और अन्य सामग्री भी बरामद हुई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार रहमान का नाम अलकायदा इन द इंडियन सब-कांटिनेंट (AQIS) के कुख्यात आतंकवादी नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ था। उसके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और आतंक से जुड़े अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज था।
फरीदाबाद जेल में कैसे हुआ हमला?
जेल सूत्रों ने बताया कि दोनों कैदी—अब्दुल रहमान और अरुण चौधरी—को हाई-सिक्योरिटी सेल में रखा गया था। रात के समय दरारें बढ़ने के बाद विवाद हुआ और इसी दौरान अरुण ने नुकीली वस्तु से अब्दुल पर हमला कर दिया। हमला इतना भयानक था कि रहमान की तुरंत ही मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही जेल अधिकारियों ने बैरक को सील कर दिया और तत्काल पोस्ट-मॉर्टम के लिए शव को भेज दिया। फिलहाल हिस्ट्री और CCTV फुटेज सहित अन्य सबूतों की जांच जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था और सस्पेंशन
अब्दुल रहमान की मौत की रिपोर्ट के बाद हरियाणा Director General of Prisons (DGP) अलोक मित्तल ने मामले को गंभीर सुरक्षा चूक माना है। इस मामले में नीमका जेल के जेल सुपरिटेंडेंट हरेंद्र कुमार और DSP (सुरक्षा) सचिन कौशिक दोनों को निलंबित कर दिया गया है। दो वरिष्ठ अधिकारियों का सस्पेंशन यह संकेत देता है कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठे हैं।
सरकार ने कहा है कि जांच जारी रहेगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि धारदार हथियार कैसे उच्च-सिक्योरिटी बैरक तक पहुंचा।
व्यापक प्रभाव
अब्दुल रहमान की जेल में हत्या देशभर में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी प्रथाओं पर नई बहस पैदा कर रही है। यह घटना बताती है कि जेल सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है—खासकर जब बात ऐसे कैदियों की हो जिनके खिलाफ आतंकी खतरों के आरोप हों। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा चूक कितनी गंभीर थी और किन कमियों से यह घटना संभव हो पाई।
न्यूज़ डेस्क













