ताज़ा अपडेट | 28 फ़रवरी 2026
अमरीका और इज़राइल ने शनिवार को ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे मध्य पूर्व में तनाव में एक बड़ा उछाल आया है और युद्ध की खबरों को बल मिला है। यह हमला उन महीनों की कूटनीतिक विफलताओं के बाद हुआ है, जिनमें ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंताएँ तेज़ थीं।
जो हुआ: संयुक्त हवाई और मिसाइल हमले
28 फ़रवरी की सुबह अमेरिकी और इज़राइली बलों ने ईरान के विभिन्न शहरों पर हवाई और मिसाइल हमले किए। इन हमलों की अध्यक्षता संयुक्त रूप से की गई, जिसमें तेहरान, क़ोम, इस्फ़हान, कराज और केर्मानशाह जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया गया। धमाकों की गूँज राजधानी तेहरान सहित कई इलाकों में सुनी गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इन हमलों का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढांचे को घटाना है ताकि वह “आत्मिक और बैलेस्टिक खतरे” पैदा न कर सके। उन्होंने ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ “मुख्य मुकाबला संचालन” शुरू होने की घोषणा की है।
पीछे की वजह: परमाणु कार्यक्रम और तनाव
टॉप सैन्य और कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि यह संयुक्त हमला उन कई महीनों के तनाव का नतीजा है, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान को अपने परमाणु और बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को समाप्त करने के लिए दबाव डाला। बातचीत और संधियों के बावजूद ईरान ने मिसाइल प्रतिबंधों और परमाणु गतिविधियों के मुद्दों पर सहमति नहीं जताई, जिससे तनाव उग्र हुआ।
ईरान की सरकार ने हालांकि बार-बार कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का “कड़ा प्रतिशोध” देगा। वह विश्व समुदाय से कहा है कि उसके हथियार कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा है, न कि आक्रमण।
ईरान का जवाब: मिसाइल और ड्रोन् हमले
इज़राइल और अमेरिका के हमलों के तुरंत बाद ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले के साथ जवाबी कार्रवाई की। इसमें उसने न केवल इज़राइल बल्कि यूएस सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, खासतौर से जिनका इस्तेमाल मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस जवाबी कार्रवाई से क्षेत्र में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।
उसी समय तेहरान और इज़राइल ने अपने-अपने हवाई क्षेत्रों को बंद कर दिया, जिससे उड़ानों और नागरिक आवागमन पर भी असर पड़ा है। कई मध्य पूर्व देशों ने भी अपना हवाई नियंत्रण बंद किया है।
क्या यह पूर्ण युद्ध की शुरुआत है?
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह अब एक स्थानीय संघर्ष से बड़े में बदल गया है, जहाँ प्रत्यक्ष युद्ध की संभावना बढ़ रही है। हालांकि पूर्ण युद्ध का पैमाना कितना बड़ा होगा, यह आगे के कई दिनों में स्पष्ट होगा।
ट्रंप और नेतन्याहू जैसे नेताओं ने कहा है कि उनका उद्देश्य केवल “खतरे को समाप्त करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना” है, लेकिन प्रतिशोधी हमलों और जवाबी कार्रवाई की वजह से इलाके में युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और असर
इस अचानक उग्र संघर्ष ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। इसके अलावा, युद्ध की आशंका के बीच तेल बाजार अस्थिर हुआ है और आर्थिक सुगमता प्रभावित होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव बढ़ता है, तो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े बदलाव आ सकते हैं, जिनका असर दक्षिण एशिया सहित कई हिस्सों में देखा जाएगा।
निष्कर्ष
आज का संयुक्त हमला अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान को बड़ा संदेश है — यह कि वे अपने सुरक्षा लक्ष्यों को लेकर तैयार हैं। वहीं, ईरान के जवाबी हमले से स्पष्ट होता है कि वह भी पीछे नहीं हटेगा। इस तेज़ी से बदलते संघर्ष ने यह संकेत दिया है कि मध्य पूर्व अब फिर एक गंभीर सैन्य टकराव के बीच खड़ा है, और अगले कुछ दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह किस दिशा में आगे बढ़ता है।
न्यूज़ डेस्क













