एक राजा-एक व्यापारी… देवी भगवती के पहले उपासक, जिनके कारण सामने आई श्रीदुर्गा सप्तशती

श्रीदुर्गा सप्तशती ग्रंथ और देवी का चित्र”

प्राचीन हिन्दू पुराणों में एक प्रेरणादायक कहानी है जहाँ राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य को जीवन की दुःखभरी स्थिति ने देवी भगवती की खोज पर प्रेरित किया। उनके तप, भक्ति और ऋषि मेड्हा की शिक्षा ने ‘श्रीदुर्गा सप्तशती’ को जन्म दिया — एक ऐसा ग्रंथ जो देवी के रूपों, उनके संघर्षों और शक्ति के संदेश को संजोये हुए है। इस कहानी का प्रभाव आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से देखा जाता है।

भूमिका

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शक्ति की उपासना एक अनोखी गहराई और रहस्य लिए हुए है। “शक्ति” केवल देवी दुर्गा या काली का रूप नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड की वह ऊर्जा है जो जीवन को गति देती है। इसी शक्ति के महात्म्य का पहला संगठित ग्रंथ माना जाता है — श्रीदुर्गा सप्तशती

लेकिन इस महान ग्रंथ की रचना का आधार बनी दो अद्भुत शख्सियतें — राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य (व्यापारी)। एक ने अपना राज्य खो दिया था, दूसरा अपने परिवार और संपत्ति से वंचित हो गया था। दोनों दुखी होकर आश्रय ढूँढते हुए पहुँचे ऋषि मेड्हा के पास। और यहीं से शुरू होती है वह दिव्य यात्रा, जिसके कारण देवी महात्म्य और बाद में दुर्गा सप्तशती का प्राकट्य हुआ।


राजा सुरथ की कथा

राजा सुरथ एक न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ शासक थे। किंतु कालचक्र ने पलटी मारी और शत्रुओं ने उनका राज्य उनसे छीन लिया।
राजा को अपने गढ़ और सिंहासन से निर्वासित होना पड़ा। मन भटकता रहा — “क्यों मेरा सब कुछ छिन गया? क्यों मैं हीन हुआ?”

उनके अंदर राजसत्ता की स्मृतियाँ बार-बार जाग उठती थीं। भले ही राज्य चला गया, लेकिन मन में मोह बना रहा। यही मोह उन्हें मुक्ति की खोज की ओर ले गया।

“राजा सुरथ ध्यान करते हुए देवी की आराधना में”
“राजा सुरथ ध्यान करते हुए देवी की आराधना में” pic Aaj tak

समाधि वैश्य की पीड़ा

उसी समय एक वैश्य जिसका नाम समाधि था, अपने परिवार और व्यापार से वंचित हो गया।
उसके रिश्तेदारों ने ही उसे ठुकरा दिया। सांसारिक मोह और टूटे रिश्तों ने उसे भीतर से तोड़ दिया।

राजा और वैश्य दोनों अलग पृष्ठभूमि से थे, लेकिन उनकी पीड़ा एक जैसी थी — मोह और दुख

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मेड्हा ऋषि से मिलन

दोनों की भटकन उन्हें एक ही स्थान पर ले आई — ऋषि मेड्हा (या सुमेधा) का आश्रम।
ऋषि ने धैर्य से उनकी बातें सुनीं। राजा ने अपना राजपाट खोने का दुख बताया, वैश्य ने रिश्तों में धोखे की कहानी।

ऋषि ने कहा —
“हे राजन! हे वैश्य! यह मोह और दुख माया है। देवी ही इस जगत की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। उन्हीं की इच्छा से सुख-दुख, मोह-माया सब चलता है। यदि मुक्ति चाहिए तो देवी की उपासना करो।”


देवी महात्म्य का कथन

मेड्हा ऋषि ने फिर देवी के विभिन्न लीलाओं और युद्धों का वर्णन करना शुरू किया।
यही वर्णन बाद में श्रीदुर्गा सप्तशती के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

  • मधु-कैटभ वध — जहाँ देवी ने ब्रह्मा को बचाया और असुरों का अंत किया।
  • महिषासुर मर्दिनी — देवी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को पुनः स्वर्ग दिलाया।
  • शुंभ-निशुंभ युद्ध — देवी ने अपने अनेक रूपों से दैत्यों का संहार किया।

इन कथाओं के माध्यम से ऋषि ने यह सिखाया कि संसार का हर मोह अस्थायी है, शाश्वत है तो केवल देवी शक्ति


श्री दुर्गा सप्तशती का उद्भव

यहीं से जन्म हुआ दुर्गा सप्तशती का, जिसे चंडी पाठ या देवी महात्म्य भी कहते हैं।
यह 700 श्लोकों का संग्रह है, जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है।

यह ग्रंथ न केवल पौराणिक कथाएँ सुनाता है बल्कि यह संदेश भी देता है कि—

  • कठिनाइयों से लड़ने के लिए आंतरिक शक्ति जगानी होगी।
  • मोह-माया से ऊपर उठकर भक्ति और श्रद्धा में टिकना होगा।
  • देवी शक्ति ही असली आधार है।

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गरह जंगल (Garh Jungle) और ऐतिहासिक संदर्भ

पौराणिक मान्यता है कि गढ जंगल (पश्चिम बंगाल) ही वह स्थान था, जहाँ राजा सुरथ और समाधि ने तप किया।
आज भी वहाँ मेड्हा मुनी आश्रम और देवी का मंदिर मौजूद है।

यह स्थान श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।

समाधि वैश्य देवी भगवती की भक्ति करते हुए

सामाजिक और धार्मिक प्रभाव

  1. नवरात्रि और दुर्गा पूजा — सप्तशती पाठ इन पर्वों का केंद्र है।
  2. शक्ति साधना — राजा और वैश्य की कथा यह संदेश देती है कि कोई भी व्यक्ति — चाहे राजा हो या व्यापारी — देवी की शरण में आकर मुक्ति पा सकता है।
  3. सामाजिक प्रेरणा — यह कथा दुखी लोगों को आशा और शक्ति देती है।

एक राजा-एक व्यापारी… देवी भगवती के पहले उपासक, जिनके कारण सामने आई श्रीदुर्गा सप्तशती


आधुनिक दृष्टिकोण

आज जब हम मनोविज्ञान और जीवन प्रबंधन की बात करते हैं, तो राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा हमें यह सिखाती है कि—

  • धन, सत्ता, परिवार सब अस्थायी है।
  • सच्ची शांति केवल भीतर की ऊर्जा (inner strength) और भक्ति से मिलती है।
  • Durga Saptashati आज भी लाखों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन करती है।

6 FAQs

Q1. श्रीदुर्गा सप्तशती क्या है?
👉 यह 700 श्लोकों का ग्रंथ है जो मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है और देवी शक्ति की महिमा का वर्णन करता है।

Q2. राजा सुरथ कौन थे?
👉 एक पौराणिक राजा जिन्होंने अपना राज्य खोने के बाद ऋषि मेड्हा से शिक्षा पाई और देवी की उपासना की।

Q3. समाधि वैश्य की क्या भूमिका है?
👉 वह एक व्यापारी था जिसने परिवार और संपत्ति खो दी और दुख से मुक्ति की तलाश में देवी की शरण ली।

Q4. मेड्हा ऋषि कौन थे?
👉 वही ऋषि जिन्होंने राजा और वैश्य को देवी महात्म्य का उपदेश दिया और सप्तशती की कथाएँ सुनाईं।

Q5. दुर्गा सप्तशती का पाठ कब किया जाता है?
👉 खासतौर पर नवरात्रि, दुर्गा पूजा और शक्ति साधना के अवसरों पर।

Q6. गरह जंगल कहाँ स्थित है?
👉 पश्चिम बंगाल में, जहाँ माना जाता है कि राजा सुरथ और समाधि ने तपस्या की थी।

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