Taza Views | अपडेट: 23 सितंबर 2025
Shardiya Navratri 2025 Day 2 मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, भोग, मंत्र, आरती, रंग और महत्व। Maa Brahmacharini की उपासना से मिलती है तप, संयम, ज्ञान और आत्मिक शक्ति। पढ़ें पूरी जानकारी, कैसे करें मां की पूजा, कौन सा भोग अर्पित करें और क्या लाभ प्राप्त होंगे।
चर्चा का विषय
Shardiya Navratri 2025 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि का त्योहार हिंदू धर्म की श्रेष्ठ आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है। इस पर्व के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जो अलग-अलग गुणों और शक्तियों का प्रतीक हैं। दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है जो तपस्या, संयम, ज्ञान और आत्म-शुद्धि की देवी मानी जाती हैं। आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि मां ब्रह्मचारिणी किस रूप में पूजी जाती हैं, पूजा की विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग, आरती और पूजा से मिलने वाले फायदे।
मां ब्रह्मचारिणी कौन हैं?
- मां ब्रह्मचारिणी, देवी दुर्गा के नौ रूपों में दूसरा स्वरूप है। The Times of India
- उनका स्वरूप शांत, संयमी और तपस्वी है। वह ज्ञान और भक्ति की देवी हैं। उनके हाथ में माला और कमण्डल है। माला भक्ति और ध्यान का प्रतीक, कमण्डल तर्पण, आत्म-शुद्धि और तपस्या का प्रतीक है। Wikipedia
- माता ब्रह्मचारिणी को साधना और तपस्या हेतु प्रेरणा देने वाली देवी माना जाता है — जो वैराग्य और आत्म-नियंत्रण की ओर ले जाती हैं। Jagran
पूजा का महत्व
- इस दिन की पूजा से भक्तों को ज्ञान, विवेक, धैर्य और आत्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
- जो लोग अध्ययन कर रहे हैं, वे विशेष रूप से इस दिन पूजा करें — उनके लिए यह शुभ माना जाता है कि उनकी स्मृति, अध्ययन की क्षमता और सफलता में वृद्धि होगी। Jagran
- आत्मसंयम, व्रत, भक्ति व तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपने अहंकार, आलस्य, लोभ, ईर्ष्या जैसे दोषों से मुक्ति पा सकता है।

रंग, पुष्प और अन्य प्रतीक
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| शुभ रंग | सफेद, पीला — मां ब्रह्मचारिणी की शांति, शुद्धता और संयम दर्शाता है। |
| पुष्प | चमेली, सफेद पुष्प, पीले फूल। आमतौर पर सफेद फूल अधिक प्रिय माने जाते हैं। ABP News |
| वस्त्र | संभव हो तो सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। |
शुभ मुहूर्त
दूसरे दिन यानी 23 सितंबर 2025 (मंगलवार) को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए ये मुहूर्त हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35–05:22 बजे
- अभिजित मुहूर्त: 11:49 AM–12:37 PM
- सायाह्न / शाम मुहूर्त: लगभग 06:35–07:46 PM ABP News
इन मुहूर्तों में पूजा करने से माना जाता है कि देवी की कृपा अधिक मिलती है और पूजा-विधि प्रभावी होती है।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
पूजा विधि सरल है, लेकिन भावना और शुद्धता महत्वपूर्ण है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को साफ-सुथरा करें, प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। गंगाजल या किसी पवित्र जल से सींचें।
- रोली (कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प अर्पित करें।
- दीप, धूप (agarbati/incense) जलाएं।
- मंत्र जाप करें और आरती करें। कमण्डल और माला जैसे प्रतीकों का ध्यान करें।
- अंत में भोग अर्पित करें और प्रसाद बाँटें। भोग में दूध, दूध से बने व्यंजन, फल, मिठाई आदि शामिल हो सकते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी मंत्र और आरती
प्रमुख मंत्र:
- “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः”
- “या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”
आरती (संक्षिप्त):
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसार।।
(भक्तों द्वारा श्रद्धा व मनोकामना से गाया जाता है)
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भोग-प्रसाद
मां ब्रह्मचारिणी को अर्पित किए जाने वाले कुछ भोग:
- दूध से बने प्रसाद (खीर, दूध-मिठाई) ABP News
- फल एवं मिठाइयाँ
- पंचामृत — जिसमें दूध, दही, घी, शहद और चीनी हो सकती है
पूजा से लाभ
- आत्मिक शांति, संयम की वृद्धि और मानसिक स्थिरता।
- आलस्य, अंहकार, लोभ, ईर्ष्या जैसी बुरी प्रवृत्तियों से मुक्ति।
- छात्रों और ज्ञान-प्राप्ति की चाह रखने वालों को अध्ययन में मन लगाने की शक्ति मिलती है।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
मां ब्रह्मचारिणी का वर्णन विभिन्न पुराणों में है, जैसे देवी-भागवत, मार्कण्डेय पुराण आदि।
उनका नाम “ब्रह्मचारिणी” इसलिए पड़ा क्योंकि उन्होंने ब्रह्मचर्य (तपस्यात्मक जीवन) अपनाया था — गुरु के वचन, साधना और भक्तिपूर्ण जीवन जीने की ओर प्रेरित करती हैं।
निष्कर्ष
नवरात्रि का दूसरा दिन हमें याद दिलाता है कि भगवद भक्ति ही एक ऐसी शक्ति है जो जीवन में स्थिरता, संयम और ज्ञान लेकर आती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हमें सिखाती है कि साधना, तप और आत्मशुद्धि से कैसे हम अपने अंदर छुपी शक्ति को जगाएँ।
इस दिन की पूजा भाव से, सच्चे मन से और उपयुक्त विधि से करें — भाव है कि मां हमारी आंतरिक ऊर्जा को जागृत करें और हमें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति दें।
✅ FAQs (6)
Q1. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों की जाती है?
👉 मां ब्रह्मचारिणी तप, संयम और ज्ञान की देवी हैं। उनकी पूजा से आत्मबल और विवेक बढ़ता है।
Q2. Maa Brahmacharini का स्वरूप कैसा है?
👉 उनके हाथ में माला और कमण्डल है, जो भक्ति और तप का प्रतीक हैं।
Q3. Navratri 2025 Day 2 का शुभ मुहूर्त क्या है?
👉 23 सितंबर 2025 को ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और शाम का समय शुभ है।
Q4. मां ब्रह्मचारिणी को कौन सा भोग अर्पित करें?
👉 दूध, खीर, फल और पंचामृत का भोग सबसे शुभ माना जाता है।
Q5. Maa Brahmacharini का प्रिय रंग कौन सा है?
👉 सफेद और पीला रंग मां को अत्यंत प्रिय है।
Q6. मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र कौन से हैं?
👉 “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः” और “या देवी सर्वभूतेषु” विशेष मंत्र हैं।













