पटना / रपटः आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर NDA के अंदर मतभेद सार्वजनिक होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में Hindustani Awam Morcha (HAM-S) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक साहित्यिक और राजनीतिक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की “रश्मिरथी” कविता का हवाला देते हुए भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। मांझी ने कहा:
“हो न्याय अगर तो आधा दो, … दे दो केवल 15 ग्राम … HAM वहीं खुशी से खाएंगे”
इस पंक्ति को उन्होंने थोड़ा रूपांतरित करके यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी को केवल 15 सीटें देना उचित नहीं — और यदि यह नहीं हुआ, तो उनकी नाराजगी सामने आएगी। (TOI)
इस मोड़ ने सीट-बंटवारे की बातचीत को और जटिल बना दिया है, और यह स्पष्ट संकेत है कि छोटे NDA सहयोगी अब अपने हिस्से की हिस्सेदारी की लड़ाई और तेज़ कर रहे हैं।
चर्चा का विषय
🔸राजनीतिक पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
सीट-बंटवारे की जटिल राजनीति
- बिहार में विधानसभा निर्वाचन 2025 दो चरणों में होंगे: 6 और 11 नवंबर। NDA और विपक्ष (महागठबंधन / INDIA ब्लॉक) में सीट-बंटवारे की रस्साकशी थम नहीं रही है।
- NDA की प्रमुख पार्टियाँ — BJP और JD(U) — बड़े हिस्से पर पहले से सहमत हैं, लेकिन छोटे सहयोगी जैसे HAM-S (मांझी की पार्टी), LJP (चिराग पासवान), RLM आदि अब अपनी मांगें तेज कर रहे हैं। (HT)
- रिपोर्टों के अनुसार मांझी ने 15 सीटों की मांग रखी है — यदि यह पूरी नहीं होती, तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन NDA को समर्थन देते रहने की बात कही है। (NDTV)
कविता का उपयोग — सांस्कृतिक दांव
- मांझी ने दिनकर की “रश्मिरथी” कविता की प्रसिद्ध पंक्ति को ख़ुद रूपांतरित किया: मूल में “5 ग्राम” का उल्लेख था, उन्होंने इसे “15 ग्राम / 15 ग्राम” में बदला। इससे अपेक्षाएँ और भावनात्मक संबंध दोनों ही स्थापित किया गया। (IndiaTV News)
- यह कदम राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है — कविता की भाषा और भावनात्मक शक्ति का उपयोग कर अपनी मांग को नैतिक ऊँचाई देना।
उदाहरण:
वह पंक्तियाँ इस प्रकार थीं:
“हो न्याय अगर तो आधा दो / यदि उसमें भी कोई बाधा हो / तो दे दो केवल 15 ग्राम …”
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🔸प्रभाव और चुनौतियाँ
NDA के भीतर तनाव
- मांझी का यह बयान संकेत है कि NDA के भीतर साझेदारी में तनाव खुलकर सामने आ गया है।
- यदि मांझी को पर्याप्त सीटें न मिले, तो HAM-S अलग मोर्चा बना सकती है या दबाव बढ़ा सकती है।
- यह राजनीति में यह संदेश भेजता है कि छोटे दलों की हिस्सेदारी अब सिर्फ symbolic नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व की हो गई है।
BJP और JD(U) के लिए दबाव
- BJP और JD(U) को यह दिखाना है कि वे मजबूत साझेदार हैं और छोटे सहयोगियों को सम्मानपूर्ण हिस्सेदारी देंगे।
- यदि HAM-S या अन्य सहयोगियों की नाराज़गी बढ़ी, तो NDA की एकता कठिनाई में आ सकती है।
- विपक्ष इसे अवसर मानकर HAM-S के पक्ष मे रुख बना सकती है, विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण कर सकती है।
मतदाता असर
- ऐसे बयान सामान्य मतदाताओं को यह संकेत देते हैं कि राजनीतिक समझौतों में पारदर्शिता और न्याय अपेक्षित है।
- कविता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से मांझी ने एक narrative तैयार किया है — “न्याय नहीं मिलेगा, तो सीट नहीं देंगे” — जो चुनावी संवाद में असर कर सकती है।

🔸आगे का रास्ता — क्या होना बाकी है?
- NDA सीट-समझौते की घोषणा — यह अपेक्षा है कि 9 अक्टूबर तक सीट वितरण की घोषणा हो सकती है। (Times of India)
- मांझी का अंतिम निर्णय — यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो HAM-S अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकती है — लड़ने की घोषणा या समर्थन छोड़ने की चेतावनी।
- चिराग पासवान और अन्य दलों की दावेदारी — LJP (RV) भी अपनी सीट मांग को लेकर सक्रिय है, संभव है मांझी के बयान पर और दबाव बने।
- राजनैतिक बयानबाजी और तर्क-वितर्क — बीजेपी विरोध में मांझी को निशाना बना सकती है, या सीटों को पुनर्वितरित करने का प्रस्ताव रख सकती है।
- मतदाता और मीडिया प्रतिक्रिया — यह बयान चुनावी चर्चाओं में गूंजेगा — मीडिया विश्लेषणों में जलेंगे, राज्यभर में चर्चा बढ़ेगी।
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🔹 FAQs
Q1. बिहार चुनाव 2025 में NDA का सीट बंटवारा कब घोषित होगा?
👉 रिपोर्ट्स के अनुसार 9 अक्टूबर तक सीट शेयरिंग का ऐलान हो सकता है।
Q2. जीतन राम मांझी ने बीजेपी पर कविता का सहारा क्यों लिया?
👉 उन्होंने दिनकर की रश्मिरथी से प्रेरित कविता का हवाला देकर सीटों की मांग को सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप दिया।
Q3. HAM ने बिहार चुनाव में कितनी सीटें मांगी हैं?
👉 मांझी ने NDA से 15 सीटों की मांग की है।
Q4. अगर मांझी की मांग पूरी नहीं हुई तो क्या होगा?
👉 उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी, लेकिन NDA को समर्थन देती रहेगी।
Q5. NDA में सीट-बंटवारे पर और कौन नाराज़ है?
👉 चिराग पासवान (LJP) और अन्य छोटे सहयोगी भी अपनी सीट मांग पर अड़े हैं।
Q6. विपक्ष इस विवाद का कैसे फायदा उठा सकता है?
👉 महागठबंधन NDA की नाराज़गी को भुनाकर छोटे दलों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर सकता है।
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