पटना, 15 अक्टूबर 2025 – बिहार की राजनीति में जाति हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाती आई है, और बिहार विधानसभा चुनाव 2020 कोई अपवाद नहीं था। NDA ने 125 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, लेकिन महागठबंधन ने कड़ी टक्कर दी। यह विश्लेषण Lokniti-CSDS के पोस्ट-पोल सर्वे जैसे रिसर्च-आधारित डेटा पर आधारित है, जो दर्शाता है कि कैसे विभिन्न जातियां NDA, महागठबंधन (MGB) और अन्य दलों के पक्ष में बंटीं। हम इसे सरल भाषा में समझाएंगे, जिसमें प्रमुख जातियों के वोटिंग पैटर्न, जेंडर अंतर और संभावित प्रभाव शामिल हैं। साथ ही, स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं और आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट्स के लिंक्स भी जोड़े गए हैं।
चर्चा का विषय
जातिगत गठबंधन: दो प्रमुख ध्रुवीकरण
2020 चुनाव में दो मुख्य जातिगत ध्रुवीकरण उभरे: एक ओर यादव और मुस्लिम महागठबंधन के साथ मजबूती से जुड़े, जबकि दूसरी ओर ऊपरी जातियां, कुर्मी, कोएरी और अति पिछड़ी जातियां (EBC) NDA के साथ। दलित वोट स्विंग फैक्टर बना, जो चरणों के अनुसार बदला। Lokniti-CSDS सर्वे के अनुसार, NDA का कुल वोट शेयर 37.3% था, जबकि MGB का 37.2% – अंतर सिर्फ 0.1% का, लेकिन सीटों में NDA आगे रहा।
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डेटा एनालिसिस: सर्वे से निकले प्रमुख आंकड़े (NDA, MGB और अन्य के लिए वोट शेयर प्रतिशत में):
- ऊपरी जातियां (ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत आदि, कुल आबादी का ~15%): NDA को मजबूत समर्थन (ब्राह्मण 52%, भूमिहार 51%, राजपूत 55%, अन्य ऊपरी 59%)। महिलाओं में NDA का समर्थन पुरुषों से ज्यादा (59% vs 49%)। यह BJP की पारंपरिक आधार है, जो विकास और मोदी फैक्टर से मजबूत हुई।
- कुर्मी (नीतीश कुमार की जाति, ~7%): 81% NDA को वोट, जिसमें महिलाओं का योगदान ज्यादा। JD(U) की रणनीति यहां कामयाब रही, लेकिन LJP ने कुछ वोट काटे।
- कोएरी (~3-4%): करीब 51-60% NDA को, महिलाओं में ज्यादा (63% vs 59%)। EBC के साथ मिलकर NDA का OBC आधार मजबूत किया।
- अन्य OBC/EBC (अति पिछड़ी जातियां, कुल OBC का ~25-30%): 58-60% NDA को, महिलाओं में ज्यादा। नीतीश की ‘अति पिछड़ा’ नीतियां यहां प्रभावी रहीं, लेकिन बेरोजगारी ने कुछ वोट MGB की ओर मोड़े।
- यादव (~14%): 90% MGB (मुख्यत: RJD) को वोट, सभी चरणों में मजबूत एकजुटता। जेंडर अंतर कम, लेकिन महिलाएं थोड़ी कम MGB की ओर। तेजस्वी यादव की अपील ने इस आधार को मजबूत किया।
- मुस्लिम (~16%): 75-76% MGB को, पहले दो चरणों में 90% तक। तीसरे चरण में AIMIM ने सीमांचल में 20-25% काटा। पुरुषों से महिलाएं कम MGB की ओर। 13 धार्मिक ध्रुवीकरण ने NDA को हिंदू वोट मजबूत किए।
- दलित (SC, ~16%): स्विंग वोट – कुल 30% NDA, 24% MGB, 13% LJP (खासकर दुसाध/पासवान में 32%)। उप-जातियों में:
- मुसहर (महादलित): 65% NDA।
- रविदास: 34% MGB।
- दुसाध: 22% MGB, लेकिन LJP ने NDA से वोट काटे।
महिलाओं में NDA ज्यादा (33% vs 27%)। पहले दो चरणों में MGB मजबूत (कम्युनिस्ट गठबंधन से), तीसरे में NDA।

विश्लेषण: जातिगत एकजुटता ने चुनाव को करीबी बनाया। NDA की जीत में महिलाओं का उच्च टर्नआउट (59.7% vs पुरुष 54.7%) निर्णायक रहा, खासकर ऊपरी, कुर्मी-कोएरी और EBC महिलाओं में। 12 MGB ने बेरोजगारी (20% वोटर्स के लिए मुख्य मुद्दा) पर जोर दिया, जहां युवा पुरुषों (18-29 साल) में 40% समर्थन मिला, लेकिन युवा महिलाओं ने NDA चुना (41%)। अगर LJP NDA के साथ रहती, तो NDA की सीटें 150+ हो सकती थीं, क्योंकि उसने JD(U) की 20+ सीटों पर वोट स्प्लिट किया। सरल शब्दों में: जाति ने वोट तय किए, लेकिन जेंडर और मुद्दों ने बैलेंस बदला।
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प्रभाव और रणनीतिक सबक
NDA में वोट ट्रांसफर कमजोर रहा – JD(U) वाली सीटों पर BJP वोटर्स का सिर्फ 55% ट्रांसफर, जबकि 13% LJP गए। MGB में ट्रांसफर मजबूत (83-90%)। 13 दलितों का स्विंग ने तीसरे चरण में NDA को बढ़त दी, जहां गैर-यादव हिंदू एकजुट हुए। 2025 में ये पैटर्न दोहरा सकते हैं, लेकिन EBC और दलितों पर फोकस बढ़ेगा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं
2020 चुनाव के दौरान और बाद में बिहारवासियों ने सोशल मीडिया पर जातिगत प्रभाव पर खुलकर चर्चा की। X (तब Twitter) पर कई ने मुद्दों vs जाति की बहस की। यहां एक उदाहरण:
- एक यूजर (@Gauri_News) ने लिखा: “Bihar Elections 2020: An On-Ground Analysis… Did issues trump caste politics of Bihar?” (वीडियो में सीनियर जर्नलिस्ट पुष्य मित्रा के साथ ग्राउंड एनालिसिस, जहां पहले चरण से तीसरे तक बदलाव और जाति vs मुद्दों की चर्चा)। (लिंक: )
Bihar Elections 2020: An On- Ground Analysis with Senior Journalist and Writer Pushya Mitra
— Gauri Lankesh News (@Gauri_News) November 7, 2020
We discuss how the people of Bihar voted. How election changed from first phase to the third phase.Did issues trump caste politics of Bihar?https://t.co/sxpujw9YPD via @YouTube
यह पोस्ट चुनाव के दौरान की भावनाओं को दर्शाती है, जहां कई लोगों ने माना कि जाति अभी भी प्रमुख है, लेकिन मुद्दे जैसे बेरोजगारी ने युवाओं को प्रभावित किया। अन्य पोस्ट्स में भी इसी तरह की मिली-जुली राय थीं, जैसे कुछ ने RJD की यादव एकजुटता की तारीफ की, जबकि NDA की EBC रणनीति को सराहा।
आधिकारिक बयान और स्रोत
Lokniti-CSDS पोस्ट-पोल सर्वे: “जातिगत ध्रुवीकरण ने चुनाव को करीबी बनाया।”
इंडियन एक्सप्रेस एनालिसिस: “दो प्रतिस्पर्धी जातिगत एकजुटताएं – यादव-मुस्लिम vs ऊपरी-OBC NDA के साथ।”
पूरा सर्वे रिपोर्ट: Bihar Post-Poll 2020 – यहां डेमोग्राफिक ब्रेकडाउन है, लेकिन क्रॉस-टैब्स अन्य रिपोर्ट्स में।
ये स्रोत आधिकारिक सर्वे पर आधारित हैं, जो चुनाव आयोग के डेटा से वेटेड हैं। अधिक जानकारी के लिए CSDS वेबसाइट देखें।
निष्कर्ष
2020 चुनाव ने साबित किया कि बिहार में जाति राजनीति की जड़ें गहरी हैं, लेकिन जेंडर, युवा मुद्दे और चरणवार स्विंग ने नतीजे बदले। NDA की महिलाओं पर पकड़ और EBC समर्थन ने जीत दिलाई, जबकि MGB की यादव-मुस्लिम आधार ने टक्कर दी। 2025 में ये पैटर्न NDA की एकता पर असर डाल सकते हैं।
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