बिहार के कटीहार में सरकारी अस्पताल पर गंभीर आरोप, डिलीवरी के लिए ₹2500 की डिमांड। डॉक्टरों की अनुपस्थिति से परिजनों में आक्रोश। पूरी खबर पढ़ें।”
कटिहार (बिहार):
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कटिहार जिले के एक सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने आई एक गर्भवती महिला से ₹2500 की डिमांड की गई। आरोप है कि डिलीवरी केस के दौरान डॉक्टर मौके पर मौजूद ही नहीं थे और परिजनों को नर्सिंग स्टाफ से बार-बार यह कहा गया कि “पैसे दीजिए तभी केस होगा।”
चर्चा का विषय
घटना का पूरा मामला : कटिहार
स्थानीय परिवार अपनी गर्भवती महिला को लेकर सरकारी अस्पताल पहुँचा। उम्मीद थी कि यहाँ मुफ़्त इलाज और डिलीवरी सुविधा मिलेगी, क्योंकि सरकार लगातार “मुफ़्त प्रसव” (Free Delivery) और “जननी सुरक्षा योजना” (JSY) जैसी योजनाओं का प्रचार करती रही है।
लेकिन अस्पताल स्टाफ ने डिलीवरी कराने के लिए सीधे ₹2500 की डिमांड रख दी।
इस दौरान महिला की हालत गंभीर होती जा रही थी, लेकिन ड्यूटी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुँचे। परिजनों का कहना है कि मजबूरी में उन्होंने प्राइवेट अस्पताल का रुख किया।
जनता में आक्रोश
कटिहार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह खबर फैलते ही लोगों में गुस्सा है। गाँव की महिलाओं ने कहा कि –
“अगर सरकारी अस्पताल में भी इतने पैसे माँगे जाएंगे तो गरीब लोग कहाँ जाएँगे? सरकार कहती है सब फ्री है, लेकिन ग्राउंड पर तो सिर्फ़ पैसे की लूट है।”
एक अन्य ग्रामीण ने बताया –
“हम लोग टैक्स भरते हैं, वोट देते हैं, लेकिन जब अपनी बहन-बेटी को अस्पताल लाते हैं तो हमें ही भगा दिया जाता है। ये तो अन्याय है।”

सरकारी योजनाओं की हकीकत
जननी सुरक्षा योजना (JSY): गरीब गर्भवती महिलाओं को मुफ्त डिलीवरी और आर्थिक सहायता देने का वादा।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK): डिलीवरी के बाद माँ और बच्चे का मुफ्त इलाज और दवाइयाँ।
लेकिन कटिहार के इस केस ने दिखा दिया कि योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ पर चल रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
इस घटना ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर क्यों डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे?
क्यों स्टाफ ने खुलेआम पैसे की मांग की?
क्या यहाँ भ्रष्टाचार और लापरवाही ही सिस्टम बन चुकी है?
पब्लिक सेंटिमेंट और सोशल मीडिया रिएक्शन
इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। लोग #BiharHealthCrisis और #KatiharHospital जैसे हैशटैग के साथ सरकार को घेर रहे हैं।
कई लोगों ने लिखा – “सरकारी अस्पताल अगर लूट के अड्डे बन जाएँ तो ग़रीब आदमी का जीना मुश्किल हो जाएगा।”
आगे की कार्रवाई?
खबर के फैलते ही जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन जनता का विश्वास तभी लौटेगा जब
जिम्मेदारों को सस्पेंड/बर्खास्त किया जाए,
अस्पतालों में पारदर्शिता लाई जाए,
और मरीजों को सही मायनों में “मुफ़्त इलाज” दिया जाए।
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निष्कर्ष
कटिहार की यह घटना सिर्फ़ एक महिला की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की असलियत को सामने लाती है।
सरकारी अस्पतालों में अगर गर्भवती महिला से भी पैसे वसूले जाएँगे तो “आम जनता किस पर भरोसा करे?”
यह मामला अब सिर्फ़ स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि आम जनता की इंसाफ़ की लड़ाई बन चुका है।
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