Epstein Files में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख: आरोप क्या हैं, विवाद क्यों है और तथ्य क्या कहते हैं?

नई दिल्ली | 1 फरवरी 2026

अमेरिका के कुख्यात सेक्स ट्रैफिकिंग मामले से जुड़े जेफरी एपस्टीन प्रकरण ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 30 जनवरी 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) द्वारा Epstein Files Transparency Act के तहत लाखों पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। इन दस्तावेजों में कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी एक संदर्भ में दर्ज होने के बाद भारत की राजनीति और सोशल मीडिया में तीखी बहस शुरू हो गई है।

सवाल यह है कि क्या इन फाइलों में प्रधानमंत्री मोदी पर कोई ठोस आरोप है, या फिर यह केवल एक दोषी अपराधी के अप्रमाणित दावे हैं? ताज़ा व्यूज ने उपलब्ध दस्तावेजों, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक बयानों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की है।

Epstein Files क्या हैं और इन्हें क्यों जारी किया गया?

1000015759 1

जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंशियर था, जिसे नाबालिगों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया जा चुका था। 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई, लेकिन उसके नेटवर्क और संपर्कों की जांच वर्षों से जारी है।

अब जारी की गई Epstein Files में ईमेल, नोट्स, संपर्क विवरण और आंतरिक संवाद शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट किया है कि इन दस्तावेजों में दर्ज हर नाम का अर्थ आपराधिक संलिप्तता नहीं है। कई संदर्भ केवल सामाजिक, राजनीतिक या कारोबारी दावों तक सीमित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फाइलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदर्भ क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी का नाम एक कथित ईमेल में सामने आता है, जिसकी तारीख 2017 बताई जा रही है। इस ईमेल में जेफरी एपस्टीन ने दावा किया है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने उसकी सलाह पर इज़राइल की यात्रा के दौरान कुछ कूटनीतिक गतिविधियाँ कीं, जो अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति के हित में थीं।

यह संदर्भ जुलाई 2017 की उस ऐतिहासिक यात्रा से जोड़ा जा रहा है, जब नरेंद्र मोदी इज़राइल जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि:

  • दस्तावेज़ में किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य, यौन शोषण या अवैध गतिविधि का आरोप नहीं है
  • यह दावा पूरी तरह एपस्टीन के निजी ईमेल पर आधारित है, जिसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
  • न तो मोदी और एपस्टीन की किसी मुलाकात का प्रमाण है, न ही कोई आधिकारिक रिकॉर्ड, फोटो या अन्य दस्तावेज़ मौजूद हैं।
  • अमेरिकी जांच एजेंसियां पहले भी ऐसे कई दावों को “असत्यापित” और “नाम-ड्रॉपिंग” करार दे चुकी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एपस्टीन अक्सर अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता था।

अन्य नाम और अप्रत्यक्ष संदर्भ

Epstein Files में कुछ अन्य भारतीय नामों का भी उल्लेख है, जिनमें राजनीतिक और कारोबारी जगत के लोग शामिल हैं। इनमें कुछ ईमेल कथित तौर पर कूटनीतिक या निवेश संबंधी बातचीत तक सीमित बताए जा रहे हैं। अभी तक किसी भी भारतीय व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक जांच या आरोप दर्ज नहीं किए गए हैं।

भारत सरकार का आधिकारिक रुख

भारत सरकार ने इस मामले पर तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री की 2017 की इज़राइल यात्रा एक आधिकारिक और सार्वजनिक कूटनीतिक दौरा थी। इसके अलावा दस्तावेजों में दर्ज अन्य बातें एक दोषी अपराधी की कल्पनाएं हैं, जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

सरकार ने इसे बेबुनियाद, अप्रमाणित और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है।

राजनीतिक विवाद और सोशल मीडिया की भूमिका

दस्तावेज सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की है। कांग्रेस सहित कुछ दलों ने सवाल उठाए कि प्रधानमंत्री का नाम किस संदर्भ में आया, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इसे राजनीतिक दुर्भावना और अफवाह बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखी गई। कुछ पोस्ट्स ने बिना संदर्भ के दावों को सनसनीखेज तरीके से पेश किया, वहीं कई यूज़र्स और विशेषज्ञों ने तथ्यों के साथ इसे निराधार बताया।

विश्लेषण: आरोप, तथ्य और वास्तविकता

अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि:

  • Epstein Files में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कोई सीधा या अप्रत्यक्ष आपराधिक आरोप नहीं है
  • उल्लेख एक ऐसे व्यक्ति के निजी दावे पर आधारित है, जिसे अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका था।
  • किसी नई जांच, चार्जशीट या कानूनी कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है।

हालांकि, यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि वैश्विक सत्ता संरचनाओं और प्रभावशाली नेटवर्क्स को लेकर पारदर्शिता की मांग क्यों बढ़ रही है।

निष्कर्ष

Epstein Files में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख राजनीतिक और मीडिया स्तर पर सुर्खियां जरूर बना रहा है, लेकिन अब तक यह सनसनी से अधिक कुछ नहीं है। न तो कोई ठोस सबूत है, न ही कोई कानूनी आरोप। आधिकारिक बयान और उपलब्ध दस्तावेज़ इस दावे की पुष्टि नहीं करते।

ताज़ा व्यूज इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नज़र बनाए हुए है। यदि भविष्य में कोई नया दस्तावेज़ या आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो पाठकों को उससे सबसे पहले अवगत कराया जाएगा।

देश-दुनिया की ऐसी ही गहराई से जांची गई ख़बरों और विश्लेषण के लिए ताज़ा व्यूज के साथ जुड़े रहें।

अपने दोस्तों शेयर करे :-

हमसे जुड़ने के लिए फॉलो जरूर करें

Related Posts

खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: बिहार–यूपी के खेतों से शुरू हुई डिजिटल क्रांति, सरकारी आंकड़े बता रहे नई तस्वीर

नई दिल्ली/पटना/लखनऊ। भारतीय खेती अब केवल मौसम और अनुभव पर निर्भर नहीं रही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और सैटेलाइट डेटा के

Read More »

वैभव सूर्यवंशी का बड़ा फैसला: पढ़ाई से पहले क्रिकेट को दी प्राथमिकता, करियर के निर्णायक मोड़ पर युवा बल्लेबाज़

समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले से निकलकर राष्ट्रीय क्रिकेट मंच तक अपनी पहचान बना चुके युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी ने अपने

Read More »

ISRO का ‘निसार’ उपग्रह देगा देशभर में हर 13 दिनों में मिट्टी की नमी डेटा: कैसे बदल सकता है भारत की कृषि

नई दिल्ली | फरवरी 2026 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने नासा-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह के बारे में

Read More »

वैभव सूर्यवंशी: अंडर-19 हीरो अब बोर्ड परीक्षा मोड में, CBSE 10वीं एडमिट कार्ड जारी

समस्तीपुर | फरवरी 2026भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी के लिए अब एक और बड़ी चुनौति सामने आ

Read More »

ISRO को चंद्रयान-4 मिशन में बड़ी सफलता, यह भारतीय अंतरिक्ष अभियान चाँद से धरती लौटेगा

नई दिल्ली | फरवरी 2026 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को चंद्रयान-4 मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी सफलता हासिल हुई

Read More »

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: सरकार कह रही है “किसानों के हितों की हिफ़ाज़त”, किसान संगठनों ने जताईं गंभीर आपत्तियाँ

नई दिल्ली | फरवरी 2026 भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित इंटरिम ट्रेड समझौते (India-US Trade Deal) ने

Read More »
UGC 2026 क्या है मामला

UGC 2026: ‘शिक्षा सुधार’ के नाम पर डर, नियंत्रण और राजनीतिक एजेंडा — क्यों बढ़ता जा रहा है विवाद?

भारत की शिक्षा व्यवस्था पहले ही संसाधनों की कमी, बेरोज़गारी और गिरती गुणवत्ता से जूझ रही है। ऐसे समय में मोदी

Read More »

बिटकॉइन मार्केट आउटलुक 2026: तेज गिरावट के बाद निर्णायक मोड़ पर क्रिप्टो बाजार

नई दिल्ली | फरवरी 2026 वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार साल 2026 की शुरुआत में गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

Read More »

PM मोदी का मलेशिया दौरा: भारतीय समुदाय को संबोधित, द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा

कुआलालंपुर (मलेशिया) | फरवरी 7, 2026 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय मलेशिया दौरे के दौरान शनिवार को कुआलालंपुर में भारतीय समुदाय

Read More »

बिहार विधानसभा बजट सत्र 2026: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच हंगामा

पटना | फरवरी 2026बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच फिर

Read More »

बिहार में एग्रीस्टैक की रफ्तार तेज: 5 दिन में फार्मर आईडी, जिलों को मिलेगा लाखों का इनाम

एग्रीस्टैक क्या है और इसका उद्देश्य एग्रीस्टैक भारत सरकार की एक प्रमुख डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को एक यूनिक

Read More »

नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी: कौन आगे, कौन पीछे? जनवरी 2026 का ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे क्या कहता है

नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026: भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच मुकाबला अब भी सबसे गर्म टॉपिक

Read More »
Need Help?