प्रधानमंत्री मोदी का टोक्यो इलेक्ट्रॉन कारखाना दौरा: भारत-जापान सहयोग की नई इबारत लिखेगा सेमीकंडक्टर उद्योग

भारत-जापान semiconductor पार्टनरशिप: PM Modi ने टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री का किया दौरा

PM Modi ने टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री का दौरा कर भारत-जापान सेमीकंडक्टर सहयोग को नई दिशा दी। जानें कैसे बनेगा भारत सेमीकंडक्टर हब और क्या हैं इसके मायने।

टोक्यो, 30 अगस्त 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय जापान यात्रा के दूसरे दिन एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जापान की अग्रणी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड (TEL) के एक उन्नत कारखाने का दौरा किया। यह दौरा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को केंद्रीय धुरी बनाया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी भारत और जापान के बीच सहयोग की एक “की एरिया” (मुख्य क्षेत्र) है। उन्होंने कहा, “सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण भारत और जापान के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र है। हमारा लक्ष्य न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है, बल्कि एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल भविष्य का निर्माण करना है।”

PM Modi टोक्यो इलेक्ट्रॉन का महत्व और वैश्विक भूमिका

टोक्यो इलेक्ट्रॉन दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर उत्पादन उपकरण (Semiconductor Production Equipment – SPE) निर्माताओं में से एक है। कंपनी की स्थापना 1963 में हुई थी और यह सेमीकंडक्टर वेफर्स के निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले critical equipment, जैसे कॉटिंग/डेवलपमेंट सिस्टम, एचिंग सिस्टम, और डिपॉजिशन सिस्टम बनाती है। दुनिया भर में लगभग हर प्रमुख सेमीकंडक्टर फैब (जैसे TSMC, Samsung, Intel) में TEL के उपकरण लगे हुए हैं। इसलिए, भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं के लिए TEL जैसी कंपनी का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा: ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत सरकार की इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की रणनीति का एक सीधा विस्तार है। ISM को 2021 में 76,000 करोड़ रुपये (लगभग 10 बिलियन डॉलर) के बजट के साथ लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत में एक समग्र सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इस मिशन के तहत देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स (fabs), डिस्प्ले फैब्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियों, और एसेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग (ATMP) यूनिट्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

हाल के वर्षों में, इस पहल ने काफी गति पकड़ी है:

टोक्यो इलेक्ट्रॉन दौरा: PM Modi बोले - सेमीकंडक्टर है भारत-जापान सहयोग की की एरिया
  • Tata Electronics ने एक प्रमुख ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में उभर कर Dholera, Gujarat में एक सेमीकंडक्टर फैब और Assam में एक ATMP unit की स्थापना की घोषणा की है।
  • CG Power, जापान की Renesas Electronics और Thailand की Stars Microelectronics के साथ मिलकर, Sanand, Gujarat में एक ATMP unit लगा रही है।
  • U.S. की Micron Technology ने already Gujarat में 2.75 बिलियन डॉलर की ATMP unit की शुरुआत कर दी है।

यहाँ पढ़े : – भारतीय रुपया बनाम डॉलर: 2014 के बाद की बड़ी कहानी—स्थिरता, झटके और रणनीति

भारत-जापान सहयोग: PM Modi ने कहा पूरक शक्तियों का मेल

भारत और जापान की सेमीकंडक्टर साझेदारी एक आदर्श ‘win-win’ स्थिति है।

  • जापान के लिए फायदे:
    • China+1 Strategy: जापानी कंपनियाँ अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को China पर निर्भरता कम करने के लिए diversify करना चाहती हैं। भारत एक आदर्श विकल्प है।
    • विशाल बाजार: भारत का विशाल और तेजी से बढ़ता हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोटिव बाजार जापानी सेमीकंडक्टर उत्पादों के लिए एक ready market उपलब्ध कराता है।
    • स्किल्ड वर्कफोर्स: भारत में डिजाइन और इंजीनियरिंग में एक मजबूत talent pool है, जो जापानी manufacturing prowess के साथ मिलकर काम कर सकता है।
  • भारत के लिए फायदे:
    • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: जापान जैसे देश से advanced manufacturing technology और expertise का हस्तांतरण भारत के लिए game-changer होगा।
    • ग्लोबल सप्लाई चेन इंटीग्रेशन: TEL जैसी कंपनियों के निवेश और सहयोग से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न अंग बन जाएगा।
    • रोजगार सृजन: इससे हाई-टेक manufacturing में हजारों skilled jobs का सृजन होगा।

दौरे के रणनीतिक निहितार्थ

प्रधानमंत्री मोदी का TEL कारखाने का दौरा कई स्पष्ट संदेश देता है:

  1. भारत गंभीर है: यह दुनिया के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि भारत सेमीकंडक्टर manufacturing के क्षेत्र में केवल घोषणाएं नहीं कर रहा है, बल्कि दुनिया की top companies के साथ जमीनी level पर partnership बनाने के लिए proactive तरीके से काम कर रहा है।
  2. जापान एक प्राथमिक भागीदार है: भारत, जापान को अपनी सेमीकंडक्टर यात्रा में एक प्रमुख सहयोगी के रूप देखता है, USA और यूरोप के साथ-साथ।
  3. पूर्ण इकोसिस्टम पर फोकस: भारत न केवल chips बनाना चाहता है, बल्कि उन chips के निर्माण के लिए required advanced machinery और equipment के local manufacturing को भी प्रोत्साहित करना चाहता है। TEL से अपेक्षा की जा सकती है कि वह भारत में manufacturing, R&D, या maintenance facility स्थापित करे।

यहाँ पढ़े : – PM Modi, Tokyo Electron, Semiconductor, India Japan Cooperation, Make in India, India Semiconductor Mission

भविष्य की राह: क्या होगा अगला कदम?

इस दौरे के बाद, निम्नलिखित developments की उम्मीद की जा सकती है:

  • TEL का भारत में निवेश: TEL द्वारा भारत में एक technical training center, एक R&D facility, या eventually एक manufacturing unit की स्थापना की घोषणा हो सकती है।
  • जापानी कंपनियों की बाढ़: TEL के बाद, जापान की अन्य सेमीकंडक्टर giants जैसे Disco Corp. (dicing saws), Screen Holdings (cleaning equipment), या Lasertec Corp. (inspection systems) भी भारत में निवेश के लिए प्रेरित हो सकती हैं।
  • सरकार से सरकार समझौते: दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में और अधिक concrete collaboration agreements पर काम तेज होगा, जिसमें joint funding, research initiatives, और skill development programs शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष: एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मिली नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का टोक्यो इलेक्ट्रॉन का दौरा एक symbolic और substantive दोनों ही तरह की achievement है। यह दर्शाता है कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ को सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक comprehensive industrial strategy के रूप में आगे बढ़ा रहा है, जिसमें global best practices और technological partnerships को शामिल किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर जैसे जटिल और पूंजी-गहन उद्योग में सफलता सिर्फ सरकारी Incentives से नहीं, बल्कि वैश्विक विशेषज्ञता और निवेश से मिलती है। भारत और जापान की यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की economic security को मजबूत करेगी, बल्कि एक more resilient और diversified global semiconductor ecosystem के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह यात्रा भारत को ‘विश्व का फैब्रिकेशन हब’ बनाने की दिशा में एक ठोस और सराहनीय कदम साबित होगी।

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