2015 में मोदी जी ने बड़ी धूमधाम से ‘स्किल इंडिया’ लॉन्च किया। कहा गया कि देश के करोड़ों युवा बेरोजगार घूम रहे हैं, हम उन्हें ट्रेनिंग देंगे, सर्टिफिकेट देंगे, नौकरी दिलाएंगे। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) का लक्ष्य था 1.32 करोड़ लड़के-लड़कियों को स्किल्ड बनाना। बजट? करीब 14,450 करोड़ रुपये। सुनने में तो सब कुछ कमाल लगता था – शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग, RPL, स्पेशल प्रोजेक्ट्स… लेकिन दिसंबर 2025 में CAG की रिपोर्ट आई, और सारा खेल खुल गया।
रिपोर्ट का नाम है Report No. 20 of 2025। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं, संसद में पेश हुई है। CAG ने 2015 से 2022 तक की तीन फेज की जांच की – MSDE, NSDC और आठ राज्यों (बिहार, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा, असम, झारखंड, केरल) में जाकर देखा। नतीजा? जो सामने आया, वो चौंकाने वाला है।
सबसे पहले बात बैंक अकाउंट की। योजना में हर सर्टिफाइड कैंडिडेट को 500 रुपये का इंसेंटिव DBT से मिलना था। कुल 95.90 लाख लोगों के रिकॉर्ड में से 94.53% यानी 90.66 लाख के बैंक डिटेल्स या तो खाली थे, या ‘Null’, ‘N/A’, ‘शून्य’ लिखा था। बाकी में भी क्या हाल? ‘11111111111’ जैसा नंबर हजारों-लाखों बार इस्तेमाल हुआ। एक ही अकाउंट 52,381 कैंडिडेट्स से लिंक मिला। 12,122 यूनिक अकाउंट्स पर इतने सारे लोग! मतलब पैसा कहां गया? किसके खाते में? कोई नहीं जानता।

फोटो का तो मजा आ गया – एक ही फोटो सैकड़ों-हजारों लोगों की प्रोफाइल में। बिहार, यूपी, राजस्थान में ये आम बात पाई गई। मोबाइल नंबर? 96% फर्जी – ‘1000000000’, ‘1111111111’। ईमेल? ‘abc@gmail.com’ जैसा सबके लिए। असेसर (जो ट्रेनिंग चेक करते हैं) के डिटेल्स में 97% गड़बड़।
ट्रेनिंग सेंटर्स का क्या? कई जगह गए तो पाया – सेंटर बंद हैं, लेकिन पोर्टल पर चालू दिख रहे हैं। ट्रेनर? एक जिम में 900 ट्रेनर! केरल में फोटोशॉप्ड जॉब ऑफर लेटर मिले। प्लेसमेंट? कुल 56 लाख सर्टिफाइड में सिर्फ 41% को नौकरी मिली – यानी 23 लाख। बाकी 34 लाख+ का 500 रुपये का इंसेंटिव भी अटका पड़ा।
प्लानिंग? जीरो। स्किल गैप स्टडी नहीं, सेक्टर-वाइज या राज्य-वाइज ट्रेनिंग मार्केट डिमांड से मैच नहीं। 22 दूसरे मिनिस्ट्रीज और स्टेट गवर्नमेंट्स की स्किलिंग स्कीम्स से कोई कन्वर्जेंस नहीं। फंड? 10,194 करोड़ रिलीज हुए, लेकिन काफी हिस्सा लेट या अनयूज्ड। NSDC ने एडमिन खर्चे में ओवरचार्ज किया, इंटरेस्ट रोका – बाद में रिकवर हुआ।
विपक्ष तो चिल्ला रहा है – कांग्रेस, कमलनाथ, कन्नन गोपीनाथन सब कह रहे हैं ये “युवाओं के साथ धोखा” है, “स्किल इंडिया से स्कैम इंडिया”। 10,000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला। सोशल मीडिया पर मीम्स उड़ रहे हैं – “स्किल्ड इन फेक डेटा”।
सरकार क्या कह रही? मंत्रालय ने कहा – शुरुआत में अकाउंट अनिवार्य था, लेकिन ग्राउंड लेवल पर प्रॉब्लम आई तो नॉन-मैंडेटरी कर दिया। कई ट्रेनिंग पार्टनर्स ब्लैकलिस्ट हुए, FIR हुईं, पैसा रिकवर हो रहा है। चौथे फेज में Aadhaar e-KYC, SIDH पोर्टल से ट्रैकिंग शुरू की है। लेकिन CAG कह रहा है – ये सब सिस्टमिक फेलियर हैं, सिर्फ गलती नहीं।
सच तो ये है कि लाखों युवा सर्टिफिकेट लेकर घूम रहे हैं, लेकिन नौकरी नहीं। पैसा गया कहीं, पता नहीं। टैक्सपेयर का पैसा, हमारा पैसा। अच्छी स्कीम थी, लेकिन क्रियान्वयन में लापरवाही या कुछ और? जांच होनी चाहिए, सख्ती होनी चाहिए। वरना अगली स्कीम भी ऐसे ही फेल हो जाएगी।
तुम क्या सोचते हो? ये सिर्फ पेपरवर्क की गड़बड़ी है या कुछ बड़ा खेल? कमेंट में बताओ।













